पंचशील (The Five Precepts)

अहिंसा (Ahimsa)

"पाणातिपाता वेरमणी सिक्खापदं समादयामि"

अर्थ (Definition)

अहिंसा का अर्थ है किसी भी जीवित प्राणी की हत्या करने, उसे कष्ट देने या हानि पहुँचाने से बचना। यह केवल शारीरिक हिंसा का त्याग नहीं है, बल्कि मन और वचन से भी किसी को दुख न पहुँचाने का संकल्प है।

बुद्ध वाणी (The Buddha's Teaching)

भगवान बुद्ध ने त्रिपिटक में अहिंसा को परम धर्म बताया है। धम्मपद में बुद्ध कहते हैं, "सभी जीव दंड से डरते हैं, सभी को जीवन प्रिय है। अपने समान ही दूसरों को समझकर, न तो हत्या करें और न ही हत्या का कारण बनें।" (दण्डवग्ग, 129)। अभिसंद सुत्त में इसे "भयहीनता, बैरहीनता और द्रोहहीनता" का उपहार कहा गया है।

दैनिक जीवन में अभ्यास (Practice)

दैनिक जीवन में अहिंसा के पालन के लिए हमें जागरूक रहना चाहिए कि हमारे कार्यों, शब्दों या विचारों से किसी को पीड़ा न हो। यह करुणा (Compassion) और मैत्री (Loving-Kindness) के अभ्यास से पुष्ट होता है। शाकाहार अपनाना और चींटी जैसे छोटे जीवों के प्रति भी दया भाव रखना इसका व्यावहारिक रूप है।

पालन करने के लाभ (Benefits)

  • मन में शांति और निर्भयता का संचार होता है।
  • क्रोध और द्वेष की अग्नि शांत होती है।
  • समाज में प्रेम और मैत्री का वातावरण बनता है।
  • दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की प्राप्ति होती है।
  • पुनर्जन्म में सुखद गति प्राप्त होती है।

साधक का आचरण

अहिंसा का पालन करने वाला साधक सौम्य और शांत होता है। उसके चेहरे पर मैत्री का तेज होता है। वह किसी से झगड़ा नहीं करता और न ही किसी के प्रति मन में बैर रखता है। उसकी उपस्थिति मात्र से दूसरों को सुरक्षा का अनुभव होता है।

विश्वास का आधार (Why Trust?)

जो व्यक्ति चींटी तक को मारने से डरता है, वह किसी मनुष्य को धोखा देने या नुकसान पहुँचाने की सोच भी नहीं सकता। ऐसे साधक पर आँख मूंदकर विश्वास किया जा सकता है क्योंकि उसका आधार ही "मैत्री" है।

साधकों के इस परिवार में आपका स्वागत है

धम्म मित्र सिर्फ एक वेबसाइट नहीं, बल्कि शीलवान लोगों का एक समुदाय है।