नशामुक्ति (Nashamukt)
"सुरामेरयमज्जपमादठ्ठाना वेरमणी सिक्खापदं समादयामि"
अर्थ (Definition)
शराब, ड्रग्स, गांजा, भांग या किसी भी ऐसे नशीले पदार्थ का सेवन न करना जो मन को मदहोश (बेहोश) कर दे और स्मृति (Sati) का नाश करे। यह "प्रमाद" (लापरवाही) से बचने का व्रत है।
बुद्ध वाणी (The Buddha's Teaching)
बुद्ध ने कहा है कि नशा सभी बुराइयों की जड़ है। जब व्यक्ति नशे में होता है, तो वह न तो माता-पिता को पहचानता है और न ही धर्म-अधर्म को। वह शेष चार शीलों (हिंसा, चोरी, व्यभिचार, झूठ) को भी आसानी से तोड़ सकता है। नशा प्रज्ञा (Wisdom) का शत्रु है।
दैनिक जीवन में अभ्यास (Practice)
मादक पदार्थों की संगति से दूर रहना। तनाव को कम करने के लिए नशे का नहीं, बल्कि ध्यान (Meditation) का सहारा लेना। जो साधक विपश्यना करते हैं, वे जानते हैं कि नशा किस तरह संवेदनाओं के प्रति जागरूकता को धुंधला कर देता है।
पालन करने के लाभ (Benefits)
- शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन बना रहता है।
- धन की बर्बादी नहीं होती।
- परिवार और समाज में प्रतिष्ठा बनी रहती है।
- स्मृति (Mindfulness) और जागरूकता (Awareness) तीक्ष्ण रहती है।
- शर्मनाक कृत्यों से व्यक्ति बचा रहता है।
साधक का आचरण
नशामुक्त साधक हमेशा सचेत और जागरूक (Alert) रहता है। उसका व्यवहार कभी भी अनियंत्रित नहीं होता। वह शुद्ध सात्विक जीवन जीता है।
विश्वास का आधार (Why Trust?)
नशे में धुत व्यक्ति पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता, वह कब क्या कर बैठे, कोई नहीं जानता। धम्म मित्र के साधक 100% नशामुक्त होते हैं, जो उन्हें एक जिम्मेदार और भरोसेमंद साथी बनाता है। आप निश्चिंत रह सकते हैं कि आप एक होशमंद और विवेकपूर्ण व्यक्ति के साथ हैं।
साधकों के इस परिवार में आपका स्वागत है
धम्म मित्र सिर्फ एक वेबसाइट नहीं, बल्कि शीलवान लोगों का एक समुदाय है।